Tuesday, 5 January 2021

वैक्सीन में न पोर्क के अंश, न ही नपुंसकता का डर, ICMR के पूर्व चीफ ने अफवाहों को बताया बकवास

 

ICMR के पूर्व चीफ डॉ आर गंगाखेडकर ने कहा कि लोगों को ये समझना चाहिए कि इन वैक्सीन को मंजूरी देने के लिए एक सिस्टम बना है, इस पर पूरी तरह से विचार करने के बाद ही मंजूरी दी गई है. उन्होंने कहा कि इस वैक्सीन को लेने से मना करने वालों को सोचना चाहिए कि इसका नुकसान सिर्फ उन्हें ही नहीं बल्कि उनके परिवार को भी उठाना पड़ सकता है. उनके रिश्तेदार और दोस्त भी मुश्किल में पड़ सकते हैं. 


इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के पूर्व चीफ डॉ आर गंगाखेडकर ने साफ किया है कि भारत में कोरोना के जिन दो वैक्सीन को अनुमति दी गई है, उनमें पोर्क (सूअर का मांस) का कोई अंश नहीं है. आजतक से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इन अफवाहों पर एकदम यकीन करने की जरूरत नहीं है और ऐसी अफवाह बेबुनियाद और बकवास हैं. 

डॉ आर गंगाखेडकर कोरोना से जंग में एक बड़ा चेहरा रहे हैं. लॉकडाउन के दौरान डॉ गंगाखेडकर कोरोना से जुड़े अपडेट लगातार दिया करते थे. मंगलवार को आजतक से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना वैक्सीन से जुड़े सोशल मीडिया संदेशों की सत्यता की जांच के किए बिना उन्हें आगे न बढ़ाएं. 

डॉ आर गंगाखेडकर ने कहा कि लोगों को ये समझना चाहिए कि इन वैक्सीन को मंजूरी देने के लिए एक सिस्टम बना है, इस पर पूरी तरह से विचार करने के बाद ही मंजूरी दी गई है. उन्होंने कहा कि इस वैक्सीन को लेने से मना करने वालों को सोचना चाहिए कि इसका नुकसान सिर्फ उन्हें ही नहीं बल्कि उनके परिवार को भी उठाना पड़ सकता है. उनके रिश्तेदार और दोस्त भी मुश्किल में पड़ सकते हैं. 

डॉ गंगाखेडकर ने कहा कि अबतक दुनिया भर में लगभग एक करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है, लेकिन इससे अबतक किसी की मौत नहीं हुई है, कुछ लोगों को परेशानियां जरूर हुई है. लेकिन इन परेशानियों पर काबू पा लिया गया. उन्होंने कहा कि अगर लोग इसी घटना को याद रखते हैं कि तो उन्हें दिक्कत होगी. 

सोशल मीडिया के मैसेज के प्रति सावधान करते हुए उन्होंने कहा कि अगर आपके पास ऐसा कोई संदिग्ध मैसेज आता है तो आप कोरोना हेल्पलाइन पर फोन कर इसकी सत्यता जांच कर सकते हैं. इसके बाद ही इसे फॉर्वर्ड करें.

Reference: 

वैक्सीन में न पोर्क के अंश, न ही नपुंसकता का डर, ICMR के पूर्व चीफ ने अफवाहों को बताया बकवास

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